Hindi Poem of Mahadevi Verma “Priy Chintan hai ”, “प्रिय चिरन्तन है” Complete Poem for Class 10 and Class 12

प्रिय चिरन्तन है -महादेवी वर्मा

Priy Chintan hai – Mahadevi Verma

 

प्रिय चिरंतन है सजनि,
क्षण-क्षण नवीन सुहासिनी मै!

श्वास में मुझको छिपाकर वह असीम विशाल चिर घन
शून्य में जब छा गया उसकी सजीली साध-सा बन,
छिप कहाँ उसमें सकी
बुझ-बुझ जली चल दामिनी मैं।

छाँह को उसकी सजनि, नव आवरण अपना बनाकर
धूलि में निज अश्रु बोने में पहर सूने बिताकर,
प्रात में हँस छिप गई
ले छलकते दृग-यामिनी मै!

मिलन-मन्दिर में उठा दूँ जो सुमुख से सजल गुण्ठन,
मैं मिटूँ प्रिय में, मिटा ज्यों तप्त सिकता में सलिल कण,
सजनि! मधुर निजत्व दे
कैसे मिलूँ अभिमानिनी मैं!

Read More  Hindi Poem of Ashok Anjum “  Dwar par sakal lagakar so gye”,”द्वार पर साँकल लगाकर सो गए” Complete Poem for Class 9, Class 10 and Class 12

दीप सी युग-युग जलूँ पर वह सुभग इतना बता दे
फूँक से उसकी बुझूँ तब क्षार ही मेरा पता दे!
वह रहे आराध्य चिन्मय
मृण्मयी अनुरागिनी मैं!

सजल सीमित पुतलियाँ, पर चित्र अमिट असीम का वह
चाह एक अनन्त बसती प्राण किन्तु असीम-सा वह!
रजकणों में खेलती किस
विरज विधु की चाँदनी मैं?

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.