Hindi Poem of Subhadra Kumari Chauhan “Vyakul Chal ”, “व्याकुल चाह” Complete Poem for Class 10 and Class 12

व्याकुल चाह -सुभद्रा कुमारी चौहान

Vyakul Chal – Subhadra Kumari Chauhan

 

सोया था संयोग उसे
किस लिए जगाने आए हो?
क्या मेरे अधीर यौवन की
प्यास बुझाने आए हो??

रहने दो, रहने दो, फिर से
जाग उठेगा वह अनुराग।
बूँद-बूँद से बुझ न सकेगी,
जगी हुई जीवन की आग॥

झपकी-सी ले रही
निराशा के पलनों में व्याकुल चाह।
पल-पल विजन डुलाती उस पर
अकुलाए प्राणों की आह॥

रहने दो अब उसे न छेड़ो,
दया करो मेरे बेपीर!
उसे जगाकर क्यों करते हो?
नाहक मेरे प्राण अधीर॥

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