Hindi Short Story and Hindi Moral Story on “Ek Mashoor Thag” , “एक मशहूर ठग” Complete Hindi Prernadayak Story for Class 9, Class 10 and Class 12.

एक मशहूर ठग

Ek Mashoor Thag

 

 

एक औरत थी डल्ला |वह बहुत बड़ी ठग थी | अपनी चालाकी से लोगों को ठगना उसके लिए बाएं हाथ का खेल था | वह चुटकियों में लोगों को बेवकूफ बना देती थी |

एक बार वह एक गली से गुजर रही थी कि उसे एक सभ्य पुरुष आता हुआ दिखाई दिया | उस व्यक्ति ने किसी मित्र का पता उससे पूछा | परंतु बातों-बातों में डल्ला ने जान लिया कि वह एक धनी व्यापारी है और व्यापार के सिलसिले में कहीं बाहर जा रहा है | डल्ला ने स्वयं को उस मित्र की बहन के रूप में प्रस्तुत किया और पता बताने के बहाने गलियों में इधर-उधर घुमाने लगी |

कुछ ही देर में व्यापारी को डल्ला की बातों से यकीन हो गया कि वह उसके मित्र की बहन है और अपने धन का एक बड़ा थैला उसका हाथ में पकड़ा दिया | दोनों साथ-साथ चल रहे थे तभी एक पतली-सी गली के घर को दिखाकर डल्ला गली में घुस गई | व्यापारी भी गली में घुस गया | एक घर का दरवाजा खुला देख डल्ला उसमें घुस गई और व्यापारी भी अंदर चला गया |

घर में घुस कर डल्ला कहीं नजर नहीं आई | व्यापारी ने अपने मित्र को आवाज लगाई, परंतु वहां कुछ दूसरे लोग निकलकर आ गए | उस नाम का कोई व्यक्ति वहां नहीं रहता था | व्यापारी ने बताया कि एक स्त्री उसे मित्र की बहन बताकर यहां लाई है, परंतु लोगों ने व्यापारी को झूठा, बदमाश, लुटेरा समझकर पीटना शुरू कर दिया |

फिर भी व्यापारी को डल्ला कहीं दिखाई नहीं दी और वह पिट कर डल्ला को ढूंढ़ता हुआ वापस आ गया | उसे उसने रुपयों से भरा थैला जो पकड़ा दिया था, परंतु डल्ला कहीं नहीं मिली | दरअसल, डल्ला घर में घुसते ही दरवाजे की बगल में खड़ी हो गई थी और व्यापारी के भीतर घुसने पर तथा लोगों से बातचीत करने के बीच मौका पाकर धन लेकर चुपचाप खिसक गई थी |

अब डल्ला ने एक बड़े सर्राफ को लूटने की योजना बनाई | उसने अच्छे-अच्छे कपड़े खरीदकर पहने और बाजार में बग्घी पर बैठकर निकल गई | सर्राफ की दुकान पर एक स्त्री की गोद में बच्चा देखकर उसे खिलाने लगी | बच्चा उसकी गोद में आ गया |

डल्ला ने कहा कि वह सामने वाली दुकान में कुछ जेवर खरीदने जा रही है, तब तक बच्चा उसके पास ही खेलता रहेगा | बच्चे के मां-बाप सामने की दुकान पर ही थे अत: डल्ला को बच्चे को साथ ले जाने की अनुमति दे दी | मां-बाप ने देखा कि डल्ला सर्राफ की दुकान में जा रही है और उन्होंने सामने की दुकान से उसे अंदर जाकर बैठते देखा तो सोचा कि बच्चे को अभी ले लेंगे |

भीतर जाकर डल्ला खुद को बहुत बड़ा रईस बताकर सर्राफ से महंगे-महंगे ढेरों आभूषण देखने लगी | कुछ ही देर में डल्ला ने कहा कि उसके पति अगली दुकान पर हैं, वह उन्हें जेवर पसन्द करवाकर अभी लाती है | सर्राफ ने जेवर ले जाने को मना कर दिया तो डल्ला ने कहा ठीक है, मेरा बच्चा आपके पास यहीं पर है और मेरी बग्घी आपकी दुकान के सामने खड़ी है |

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सर्राफ ने सोचा कि औरत अपना बच्चा लेने तो जरूर आएगी, अत: डल्ला को जेवरों के डिब्बे ले जाने की इजाजत दे दी | कुछ देर तक डल्ला के न आने पर सर्राफ को फिक्र होने लगी | इतने में बच्चा रोने लगा | सामने की दुकान से मां-बाप दौड़े आए और बच्चे को गोद में उठाने लगे |

सर्राफ गुस्से में बोला – तुम लोग यह क्या करते हो ? बच्चे की मां को तो आने दो |

मां-बाप के समझाने पर भी सर्राफ नहीं माना | परंतु बच्चा उनके पास जाकर चुप हो गया तो सर्राफ को मानना पड़ा | फिर उन्होंने बग्घी वाले से पूछा कि उनकी मालिकिन कहां है और कितनी देर में आएगी ? बग्घी वाले ने बताया कि एक स्त्री ने किराए पर यह बग्घी ली थी और अंदर सर्राफ की दुकान पर गई थी | वह उसी स्त्री का इंतजार कर रहा है |

इतनी जांच-पड़ताल करते बहुत देर हो चुकी थी और डल्ला जेवर लेकर बहुत दूर तक जा चुकी थी | अब डल्ला को अगले शिकार का इंतजार था |

एक दिन उसने एक योजना बनाकर अच्छे पकवान व मिठाई बनाई | फिर साधारण कपड़े पहनकर खेतों में काम करने चली गई | उधर से उसने एक राहगीर को धन ले जाते देखा तो कुछ विचार कर उससे मीठी भाषा में बोली – भैया, इतनी गर्मी में कहां जा रहे हो ?

वह बोला – शहर जा रहा हूं | अपनी दुकान के लिए कुछ माल खरीदना है |

भैया अभी तो बड़ी धूप हो गई है, यहीं पास में मेरा घर है, वहां चलकर पानी-वानी पीकर चले जाना |

वह व्यक्ति राजी हो गया तो डल्ला ने हाथ में एक खरगोश लेकर जोर से कहा – जाओ, घर पर रसोइए से कहना मेहमान आए हैं | अत: उसका अकेले का नहीं मेहमान का भी खाना बनाए | हां, खाने में कढ़ी-चावल जरूर हो | मिठाई में हलवा और गुलाब जामुन जरूर हों |

यह कहकर डल्ला ने खरगोश को जमीन पर छोड़ दिया | खरगोश बहुत तेज भागा और कुछ ही सेकंड में आंखों से ओझल हो गया |

थोड़ी देर बातचीत के बाद डल्ला राहगीर के साथ घर की कर चल दी | घर जाकर डल्ला ने राहगीर को घड़े का ठंडा पानी पिलाया और वे सब पकवान राहगीर के आगे रख दिए जो उसने खरगोश को बताए थे | राहगीर यह सब देखकर हैरत में पड़ गया |

इतने में डल्ला भीतर के कमरे से खरगोश को हाथ में लेकर आ गई और भोजन करते समय राहगीर से बातें करने लगी | राहगीर को खरगोश देखकर लालच आ गया | वह सोचने लगा कि उसे भी अपनी दुकान से घर कितनी ही खबर भिजवानी होती है | यह खरगोश उसके बहुत काम आएगा |

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वह डल्ला से बोला – मैं यह खरगोश खरीदना चाहता हूं |

डल्ला बोली – यह तो बहुत काम का खरगोश है | मैं इसे नहीं बेच सकती | मेरे पास एक यही तो खरगोश है जो मेरी देखभाल करता है | मैं इसे तुम्हें कैसे दे सकती हूं ?

राहगीर डल्ला की खुशामद करने लगा – मेरे पास पांच सौ अशर्फी हैं, तुम इस खरगोश के बदले में सौ अशर्फी ले सकती हो |

डल्ला नहीं मानी, तो धीरे-धीरे 200, फिर 300 अशर्फी तक बात पहुंच गई | राहगीर को अब खरगोश का सौदा सस्ता लगने लगा कि बरसों तक नौकर का काम करेगा | राहगीर ने सोचा कि मैं दुकान का सामान फिर खरीद लूंगा, इस बार तो मुझे खरगोश ही खरीदना है |

वह पांच सौ अशर्फी तक देने को तैयार हो गया तो डल्ला बोली – खूब सोच समझ लो, मैं एक बार मोलभाव करके चीज वापस नहीं लेती |

राहगीर ने कहा – ठीक है, और वह पांच सौ अशर्फी देकर खरगोश लेकर चला गया | अपने गांव जाकर उसने गांव के बाहर से ही खरगोश को छोड़ते हुए जोर से कहा – घर जाकर कहना, मैं थोड़ी देर में आ रहा हूं | मक्के की रोटी सरसों का साग बना लें | फिर वह रास्ते में कुछ काम करता हुआ आधे घंटे में घर पहुंचा तो वहां खरगोश पहुंचा ही नहीं था, न ही उसकी पसंद का खाना बना था |

उस राहगीर को बहुत गुस्सा आया कि आखिर खरगोश गया कहां ? वह अपने जिस मित्र को बताता कि वह ऐसा खरगोश लाया था, वही उसका मजाक बनाता | उसने सोचा, लौटकर उस औरत की अक्ल ठिकाने लगाई जाए, जिसने ठग लिया था |

वह डल्ला के घर पहुंचा तो खरगोश देखकर चौंक गया | डल्ला अपनी ठगी जानती थी | उसने एक जैसे कई खरगोश पाल रखे थे | वह जानती थी कि राहगीर वापस जरूर आएगा | राहगीर ने ज्यों ही क्रोधित होकर खरगोश के बारे में पूछा | डल्ला बोली – तुमने खरगोश को अपना पता बताया था ?

राहगीर बोला – नहीं | तो डल्ला ने कहा – तभी खरगोश यहां वापस आ गया, इसे ले जाओ | राहगीर को डल्ला की बात जंच गई और उसने खरगोश ले लिया |

राहगीर इस बार एक मित्र को भी साथ लाया था | उन दोनों ने देखा कि डल्ला के आंगन में एक पेड़ लगा है, जिसमें पैसे ही पैसे लगे हैं और डल्ला ने उसमें से दो-चार पैसे तोड़े और घर के भीतर चली गई |

दोनों मित्रों को पैसों का पेड़ देखकर लालच आ गया | वे डल्ला से बोले – यह कौन-सा पेड़ है ?

डल्ला ने हंसते हुए कहा – तुम्हें किस चीज का लगता है ? दोनों मित्र बोले, पैसों का | डल्ला हंसने लगी | दोनों ने कुछ देर बाद देखा कि उसमें पैसे और भी ज्यादा हो गए थे | वे सोचने लगे कि जैसे नई कलियां फूल बनती जाती हैं, वैसे ही नए पैसे उगते जा रहे हैं |

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वे डल्ला से वह पेड़ मांगने लगे | डल्ला ने साफ इन्कार कर दिया | राहगीर सोचने लगा कि यदि यह पेड़ मिल जाए तो व्यापार का सारा घाटा पूरा हो जाएगा और पेड़ लेने की जिद करने लगा | दोनों मित्रों ने अपने साथ लाया सारा धन देकर पेड़ खरीद ही लिया | लेकिन शर्त के मुताबिक डल्ला ने पेड़ में पहले से लगे सारे पैसे तोड़ लिए |

दोनों मित्र पेड़ लेकर घर पहुंचे | लेकिन घर तक पहुंचते-पहुंचते पेड़ मुरझा गया | उन लोगों ने उस पेड़ की खूब सेवा की, पानी दिया | परंतु न पेड़ हरा हुआ, न ही उसमें पैसे निकले | ढूंढ़ने पर डल्ला का कहीं पता न लगा, वह वहां से दूर जा चुकी थी |

वह एक सराय में ठहरी | एक दिन 14-15 साल के लड़के को रुपयों का लालच देकर अपने साथ मिला लिया | बाजार से दो तरह के सुंदर डंडे खरीदे और योजना बनाकर रात को एक डंडे से उस लड़के को जोर-जोर से मारने लगी | शोर सुनकर अनेक लोग दौड़े आए |

लोगों ने देखा कि लड़का कुछ ही देर में अधमरा-सा होकर गिर पड़ा | डल्ला चिल्ला-चिल्लाकर कह रही थी – मेरा कहना नहीं मानता, बोल अब मानेगा | सबने सोचा कि अपने बेटे को कहना न मानने के कारण मार रही है | परंतु इतना अधिक मारने पर सभी डल्ला को बुरा-भला कहने लगे |

तभी डल्ला ने थैले से दूसरा डंडा निकाला और लड़के के ऊपर उस रंगीन डंडे को घुमाकर बोली – घुमड़ घू, घुमड़ घूं | लोग आश्चर्यचकित होकर देखते रह गए, क्योंकि लड़का उठकर बैठ गया फिर कान पकड़ते हुए बोला – मां, अब मैं कहना मानूंगा |

लोग अपने-अपने कमरों में चले गए तो उसी सराय में ठहरा एक धनी किसान डल्ला के पास आया | वह शहर में फसल बेचकर पैसा लेकर घर जा रहा था | वह डल्ला से बोला – मेरी पत्नी मेरा कहां बिल्कुल नहीं मानती, यह डंडा मुझे दे दो | चाहो तो इसकी कीमत ले लो |

नहीं, यह तो जादुई डंडा है | यह मैं नहीं दे सकती | डल्ला ने इन्कार करते हुए कहा | वह किसान नहीं माना | आखिर भाव बढ़ाते-बढ़ाते वह पांच सौ अशर्फी देने को तैयार हो गया | डल्ला ने नखरे दिखाते हुए वह दोनों डंडे किसान को दे दिए | अगले दिन किसान ने अपनी पत्नी की खूब पिटाई की तो वह अधमरी होकर गिर गई | बाद में दूसरे डंडे से वह ‘घुमड़ घूं’ करता रहा, परंतु पत्नी न उठी | सारे पड़ोसी इकट्ठे हो गए और किसान को गालियां देने लगे |

किसान की पत्नी को बहुत दिन तक अस्पताल में रहना पड़ा | किसान ने डल्ला को बहुत ढूंढ़ा, परंतु वह चकमा देकर कहीं दूर जा चुकी थी |

इसलिए कहा गया है कि किसी की अनजान बातों में यूं ही नहीं आना चाहिए, कौन जाने वह तुम्हें ठग ही रहा हो |

 

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