हाक़िम हैं Hakim he हाकिम हैं बात का बुरा क्योंकर मनाइए उनकी बला से मानिये या रूठ जाइए। घर नहीं दीवानखाने आ गए हैं आप अब उसूलन आप भी …
दिखाना Dikhana तैरता हुआ चांद मछलियों के जाल में नहीं फँसता जब सारा पानी जमकर हो जाता है बर्फ़ वह चुपके से बाहर खिसक लेता है जब झील …
लोमड़ी और बगुला Lomadi aur Bagula बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में बहुत सारे पशु पक्षी रहा करते थे| सभी जानवर आपस में मिलजुल कर …
तुम वही मन हो कि कोई दूसरे हो Tum vahi man ho ki koi dusre ho कल तुम्हें सुनसान अच्छा लग रहा था आज भीड़ें भा रही हैं …
पूरा आदमी Pura Aadmi आकाश चीख़ नहीं सकता हम चीख़ सके हैं आकाश में कोई क्या चीख़ सकता है हम में?
लोभ से विनाश Lobh se vinash बहुत समय पहले की बात है, किसी गांव में एक किसान रहता था, गांव में ही खेती का काम करके अपना और अपने …
रह-रह कर आज साँझ मन टूटे Rah rah kar aaj sanjh man tute रह-रह कर आज साँझ मन टूटे- काँचों पर गिरी हुई किरणों-सा बिछला है तनिक देर …
आए भी तो Aaye bhi to आए भी तो आए जाने की तरह आप चलिए निभाने को, आए तो सही आप आई हवा और गिरा कर चली गई तनकीद …