सूखे का गीत Sukhe ka geet सूख रहे धान और पोखर का जल, चलो पिया गुहराएँ बादल-बादल। लदे कहाँ नीम्बू या फालसे, करौंदे, बये ने बनाए हैं कहाँ-कहाँ घरौंदे, …
पक्के घर में कच्चे रिश्ते Pakke ghar me kacche rishte पुरखा पथ से पहिये रथ से मोड़ रहा है गाँव पूरे घर में ईटें-पत्थर धीरे-धीरे छानी-छप्पर छोड़ रहा …
मैं भी शायद बुरा नहीं होता Me bhi shayad bura nahi hota कोई काँटा चुभा नहीं होता दिल अगर फूल सा नहीं होता मैं भी शायद बुरा नहीं होता …
मान मौसम का कहा छाई घटा जाम उठा Maan mausam ka kaha chai ghata jam utha मान मौसम का कहा, छाई घटा, जाम उठा आग से आग बुझा, फूल …
बैठ लें कुछ देर आओ Beth le kuch der aao बैठ लें कुछ देर, आओ झील तट पत्थर-शिला पर लहर कितना तोड़ती है लहर कितना जोड़ती है देख …
कुछ तो मैं भी बहुत दिल का कमज़ोर हूँ Kuch to me bhi bahut dil ka kamjor hu कुछ तो मैं भी बहुत दिल का कमज़ोर हूँ कुछ मुहब्बत …
शीश-मौर बाँधने लगा फागुन Shish-mor bandne laga phagun आमों के शीश- मौर बाँधने लगा फागुन । शून्य की शिलाओं से- टकराकर ऊब गई, रंगहीन चाह नए रंगों में …
कोई काँटा चुभा नहीं होता Koi kanta chubha nahi hota कोई काँटा चुभा नहीं होता दिल अगर फूल सा नहीं होता कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी यूँ कोई बेवफ़ा …