मायूस तो हूं वायदे से तेरे Mayus to hu vayade se tere मायूस तो हूं वायदे से तेरे, कुछ आस नहीं कुछ आस भी है. मैं अपने ख्यालों के …
विज्ञापन Vigyapan लोग यहाँ पर विज्ञापन की गोली एक मिनट में दिख जाती है दुनिया कितनी गोल तय होता है कहाँ -कहाँ कब किसका कितना मोल जाने कितने …
मैं ज़िंदा हूँ ये मुश्तहर कीजिए Me jindau hu ye mushthar kijiye मैं ज़िंदा हूँ ये मुश्तहर कीजिए मिरे क़ातिलों को ख़बर कीजिए ज़मीं सख़्त है आसमाँ दूर है …
कब तक? Kab Tak? कपटी शकुनी से हार वरूँ मैं कब तक? कहो, तात- विपरीत तटों का सेतु बनूँ मैं कब तक? इनका-उनका बोझा-बस्ता पीठ धरूँ मैं कब …
तू हिन्दू बनेगा ना मुसलमान बनेगा Tu Hindu banege na Musalman banega तू हिन्दू बनेगा ना मुसलमान बनेगा इन्सान की औलाद है इन्सान बनेग कुदरत ने तो बनाई थी …
धूप आँगने आई Dhoop Angne aayi मन में जाने कब से चाह रहा था खुलना-खिलना अपने ढब से दी झनकार सुनाई खुलीं खिड़कियाँ दरवाज़े जागे परकोटे चिड़ियाँ छोटीं …
न तो कारवाँ की तलाश है Na to karva ki talash he ना तो कारवाँ की तलाश है, ना तो हमसफ़र की तलाश है मेरे शौक़-ए-खाना खराब को, तेरी …
हम बंजारे Hum Banjare मारे-मारे फिरते-रहते गली-गली जलती भट्ठी तपता लोहा नए रंग ने है मन मोहा चाहें जैसा मोड़ें वैसा धरे निहाई अली-बली नए-नए- औज़ार बनाएँ नाविक …