स्त्रियाँ लाती थीं मीलों दूर से भरकर घड़े Striya lati thi milo door se bharkar ghade खड़े थे कई बच्चे तितर-बितर। नहीं था पानी बिजली नहीं थी। कीचड़ था। …
साफ इन्कार में ख़ातिर शिकनी होती है Saaf inkar me khatir shikni hoti hai इल्तिजा उसकी मुहब्बत में सनी होती है साफ इन्कार में ख़ातिर शिकनी होती है …
सुन रहा हूँ इसलिये उल्लू बनाना चाहते हैं Sun raha hu isliye ullu banana chahte hai व्यर्थ की संवेदनाओं से डराना चाहते हैं सुन रहा हूँ इसलिये उल्लू …
व्यंजन पकाने की विधि Vyanjan pakane ki vidhi व्यंजन पकाने की विधियाँ कई हैं व्यंजन भी कई हैं ढेरों व्यंजनों के पर, व्यंजन विधियों को चकमा देकर कब और …
फूल जब फूलते हैं वृक्षो में Phool jab phulte hai vriksho me फूल जब फूलते हैं वृक्षों में आँखें चुपचाप उधर जैसे आभार में ऊपर उठ जाती हैं। बादल …
मैं खड़ा बीच मझधार किनारे क्या कर लेंगे Me khada bich majhdar kinare kya kar lenge मैं खड़ा बीच मझधार किनारे क्या कर लेंगे मैने छोड़ी पतवार सहारे …
आलिंगन Aalingan आलिंगन हवाओं का । और ऐसा भी कि गुज़र ही न सके हवा बीच उसके । और वह भी कि हल्का हो स्पर्श । हो बस सरसराहट …
बतर्ज-ए-मीर Batarj-e- meer अक्सर ही उपदेश करे है, जाने क्या – क्या बोले है। पहले ’अमित’ को देखा होता अब तो बहुत मुहँ खोले है। वो बेफ़िक्री, वो …