Tag: Hindi Poems
जो सपने हमने बोए थे नीम की ठंडी छावों में Jo sapne hamne boye the neem ki thandi chavo me जो सपने हमने बोए थे नीम की ठंडी छाँवों …
रात थम-थम के ढल रही होगी Raat tham-tham ke dhal rahi hogi रात थम-थम के ढल रही होगी याद पहलू बदल रही होगी ना-उम्मीदी सम्हल रही होगी आग पानी …
पढाई Padhai बाइबिल नहीं पढ़ी मैंने नहीं, कुरान नहीं गीता नहीं पढ़ी मैंने पढ़ा तुमको खुद को पढ़ा मैंने चढ़ा एसे पहाड़ पर जिस पर शायद ही चढ़ा हो …
मोची की आँखों में Mochi ki aankho me आँखें उठी हुई हैं आदम कद आस्था कि एक स्त्री खड़ी है सामने कठवत के पानी को गंगा में बदलने की …
आनेवाले ! स्वागत Aanewale swagat आनेवाले! स्वागत! जानेवाले! विदा! अगले चौराहे पर इन्तज़ार… शुक्रिया! ख़त लिखना- फागुनी बतास जब खुले! हाँ, लिखना- दूध में गुलाल जब घुले! लिखना जी: …
एक और नया गीत Ek aur naya geet चम्पा ने जब पलाश को देखा थोड़ी-सी और खिल गई! एक की हथेली ने पोंछ लिया दूजे के माथ का पसीना। …
स्वातंत्र्योत्तर भारत Swantrottar Bharat बादल तो आ गए पानी बरसा गए लेकिन यह क्या हुआ? धानों के– खिले हुए मुखड़े मुरझा गए! हवा चली–शाखों से अनगिन पत्ते बिछुड़े! बैठे …
कामरेड नछत्तर सिंह Comrade Nachattar Singh समुद्र था कि गहगह रोशन सूरज उसके अन्दर से निकल रहा था पयम्बर की तरह उसके ऊपर चलता हुआ लग रहा था नछत्तर …